जानिए कैसे एक अंग्रेज व्यापारी पी. बैरन ने 1841 में नैनीताल की खोज की।

जानिए कैसे एक अंग्रेज व्यापारी पी. बैरन ने 1841 में नैनीताल की खोज की।

आज नैनीताल दुनिया के सबसे लोकप्रिय हिल स्टेशनों में से एक है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि साल 1841 से पहले बाहरी दुनिया को इस स्वर्ग जैसी जगह के बारे में पता ही नहीं था? आधुनिक नैनीताल की खोज का श्रेय एक अंग्रेज चीनी व्यापारी मिस्टर पी. बैरन (P. Barron) को जाता है।

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स्थानीय लोगों का विरोध और पवित्र झील का रहस्य

नैनीताल हमेशा से स्थानीय निवासियों के लिए एक अत्यंत पवित्र स्थान रहा है। वे नहीं चाहते थे कि अंग्रेज या बाहरी लोग यहाँ आकर इसकी शांति और पवित्रता भंग करें। जब पी. बैरन को इस गुप्त झील के बारे में पता चला, तो वे इसे देखने के लिए बेचैन हो उठे।

उन्होंने एक स्थानीय थोकदार (गाइड) से उन्हें वहाँ ले जाने के लिए कहा। लेकिन स्थानीय लोग अंग्रेजों को गुमराह करने लगे और उन्होंने यहाँ तक कह दिया कि ऐसी कोई झील मौजूद ही नहीं है।

पी. बैरन की चतुराई और वह ‘भारी पत्थर’

बैरन समझ चुके थे कि लोग उन्हें सही रास्ता नहीं बता रहे हैं। उन्होंने एक अनोखी और थोड़ी डरावनी शर्त रखी।

  1. शर्त का किस्सा: बैरन ने एक भारी पत्थर अपने सिर पर रख लिया और स्थानीय गाइड से कहा कि वह तब तक इस पत्थर को सिर पर लेकर चलेगा जब तक कि वह झील तक नहीं पहुँच जाता।
  2. सच्चाई का सामना: बैरन ने गाइड से यह भी कहा कि अगर वे झील तक पहुँच गए, तो वह जगह उनकी होगी, और अगर नहीं पहुँचे, तो वे हार मान लेंगे।
  3. झील का दीदार: जैसे ही वे पहाड़ी की चोटी पर पहुँचे और सामने विशाल नीली झील दिखाई दी, बैरन दंग रह गए। वह इसकी खूबसूरती देखकर इतने मोहित हुए कि उन्होंने अपनी आँखों पर विश्वास नहीं किया।

बैरन ने अपनी इस यात्रा के बारे में बाद में ‘नोट्स ऑफ ए पिलग्रिम’ (Notes of a Pilgrim) नामक किताब में विस्तार से लिखा।


पिलग्रिम कॉटेज: नैनीताल का पहला घर

झील की खूबसूरती से मंत्रमुग्ध होकर, पी. बैरन ने तय किया कि वे यहाँ अपना निवास बनाएंगे।

  • उन्होंने नैनीताल में पहला बंगला बनवाया, जिसका नाम रखा गया ‘पिलग्रिम कॉटेज’ (Pilgrim Cottage)
  • इसी के साथ नैनीताल की एक शांत तीर्थ स्थल से एक आधुनिक हिल स्टेशन बनने की यात्रा शुरू हुई।

ऐतिहासिक महत्व

1841 की उस खोज के बाद, नैनीताल धीरे-धीरे अंग्रेजों की पसंदीदा जगह बन गया और बाद में इसे संयुक्त प्रांत (अब उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड) की ग्रीष्मकालीन राजधानी भी बनाया गया। आज भी नैनीताल की वादियों में पी. बैरन का नाम सम्मान के साथ लिया जाता है।

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